✏तेरे करीब रहूँ या के दूर जाऊँ मैं...
है दिल का एक ही आलम तुझी को चाहूँ मै
सुनो...
तुम्हारी दो बाहें मेरी जमीं...
तुम्हारी दो आँखें मेरा आसमान...
कहाँ मांग ली थी....
_कायनात मैंने....._
_जो इतना दर्द मिला....._
_ज़िन्दगी में....._
_पहली बार खुदा से.....
_तेरा प्यार ही....._
_तो मांगा था...!!!
तेरी और जाती हर हवा से कहते थे हम,
जरा तुमसे कह दे की बहोत याद करते है हम !!
तुम्हें बांध सकु ये बस में नहीं मेरे..
तुमसे बंध जाऊ ये हसरत जरुर है..
बाहर से रौनकें आज भी वही हैं...
,
मगर...
तेरे इश़क ने अंदर से तोड़ दिया मुझको...
तेरे चेहरे की चमक से दिखाई देता है.
तू ,किसी शायर की गजल रही होगी.
✔✔हार जाउँगा मुकदमा उस अदालत में ये मुझे यकीन था...
जहाँ वक्त बन बैठा जज और नसीब मेरा वकील था...
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