_________________________________________
बद-दुआ नहीं देता तुम्हे—
तुम्हे आंसू लगेंगे मेरे...✋!
_________________________________________
मेरे हालात का मुझे एहसास नहीं है...
मगर सब कहते है कि मैं धीरे धीरे मर रहा हूँ.....
_________________________________________
मैं आज भी रोज़ उस जगह तेरा इंतज़ार करता हूँ....
जिस जगह तूने पहली बार मुझे गले लगाया था.....
_________________________________________
आज तक उस थकान से दुख रहा है बदन.....
एक सफ़र किया.... था मैंने ख़्वाहिशों के साथ.....
_________________________________________
.मिटटी भी जमा की और खिलौने भी बनाकर देखे...
जिन्दगी कभी न मुस्कुराइ बचपन की तरह...
_________________________________________
वो मुझसे आज भी नाराज़ है.....
किसी और की बातो पर भरोसा करके.....
_________________________________________
तुम्हारे अपने ही....
दुश्मन बन जायेंगे दोस्तो......
ज़रा उनसे आगे तो निकल कर तो देखो...
_________________________________________
जब से कदम रखा है मोहब्बत के दलदल में....
आँसुओं के सिवा कुछ ना पाया हर एक पल में.....
_________________________________________
बड़ी बेपरवाह हो गई है खुशियाँ भी आजकल.....
कब आती है कब जाती है पता ही नहीं चलता....
_________________________________________
थाम लुँ तेरा हाथ और तुझे इस दुनिया से दुर ले जाऊ... जहाँ तुझे देखने वाला मेरे सिवा कोई और ना हो ......!!
_________________________________________
"दिल करता है जिन्दगी तुझे दें दू जिन्दगी की सारी खुशी तुझे दे दूं
दे दे अगर तू मुझे भरोसा अपने साथ का तो यकीन मान अपनी साँसे भी तुझे दे दूं
_________________________________________
चलो रहने देते है #मुलाकातो को..आप अपने #गुरूर मे खुश हम अपने #सुरूर मे खुश..!!!
_________________________________________
मैंने उन तमाम परिदों के पर काट दिए...
जिन को अपने अंदर उड़ते देखा था कभी....
_________________________________________
क्यों बार-बार देखतीहो, शीशे को तुम.....!!"; ➡नजरलगाओगी क्या, मेरी इकलोती☝ मोहब्बतको....!!
#
_________________________________________
महकते गुलशन में आएँगे ....पंछी हजारों ....हर पल.....
बिगड़े वक्त में ....कोई नया दोस्त बन जाए ....तो बताना.....
_________________________________________
उदास कर देती है..... हर रोज ये बात मुझे,......
ऐसा लगता है भूल रहाहै .... कोई मुझे धीरे धीरे.....!!
_________________________________________
क्यों बार-बार देखतीहो, शीशे को तुम.....!!"; ➡नजरलगाओगी क्या, मेरी इकलोती☝ मोहब्बतको....!!
_________________________________________
इश्क एक खारा सागर सा है जो दिखती अच्छी है
पर मीठा जल नही दे सकती है
_________________________________________
कांटो सी चुभती है तन्हाई! अंगारों सी सुलगती है तन्हाई! कोई आ कर हम दोनों को ज़रा हँसा दे! मैं रोता हूँ तो रोने लगती है तन्हाई!
_________________________________________
आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये .. तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये कई बार पुकारा इस दिल मैं तुम्हें और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये
_________________________________________
No comments:
Post a Comment