Dil h kii manta nhi [Sayri]

कितना समझाया दिल को कि तु प्यार ना कर;
किसी के लिए खुद को बेक़रार ना कर;
वो तेरे लिए नहीं है नादान;
ऐ पागल किसी और की अमानत का इंतज़ार ना कर!
















खामोश थे हम तो मगरूर समझ लिया;
चुप हैं हम तो मजबूर समझ लिया;
यही आप की खुशनसीबी है कि हम इतने क़रीब हैं;
फिर भी आप ने दूर समझ लिया!

















काश आपकी सूरत इतनी प्यारी ना होती;
काश आपसे मुलाक़ात हमारी ना होती;
सपनो में ही देख लेते हम आपको;
तो आज मिलने की इतनी बेकरारी ना होती!















इंतज़ार की आरज़ू अब खो गई है;
खामोशियों की आदत हो गई है;
ना शिकवा रहा ना शिकायत किसी से;
अगर है तो एक मोहब्बत, जो इन तन्हाईयों से हो गई है।



















बड़ी उम्मीद थी उनको अपना बनाने की;
तमन्ना थी उनके हो जाने की;
क्या पता था जिनके हम होना चाहते हैं;
उनको आदत ही नहीं थी किसी को अपना बनाने की!





















तुझे मोहब्बत करना नहीं आता;
मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ आता नहीं;
ज़िंदगी गुज़ारने के दो ही तरीके हैं;
एक तुझे नहीं आता, एक मुझे नहीं आता!


















कितना बेबस है इंसान किस्मत के आगे;
कितना दूर है ख्वाब हकीकत के आगे;
कोई रुकी हुई सी धड़कन से पूछे;
कितना तड़पता है यह दिल मोहब्बत के आगे।

















मैंने रब से कहा वो छोड़ के चली गई;
पता नहीं उसकी क्या मजबूरी थी;
रब ने कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं;
यह कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी।















दिल से दूर जिन्हें हम कर ना सके;
पास भी उन्हें हम कभी पा ना सके;
मिटा दिया प्यार जिसने हमारे दिल से;
हम उनका नाम लिख कर भी मिटा ना सके।














कुछ आँसू होते हैं जो बहते नहीं;
लोग अपने प्यार के बिना रहते नहीं;
हम जानते हैं आपको भी आती है हमारी याद;
पर जाने क्यों आप हमसे कहते नहीं।













A​​​दिल की किस्मत बदल न पाएगा​;​
बंधनो से निकल न पाएगा​;​
तुझको दुनिया के साथ चलना है​;​
​तु मेरे साथ चल न पाएगा​।

Altaf Raja

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