कंधो से कह दो की झुकना है मना,
बोझ उठाने की ताक़त अभी बाकी है दिल मे..
कदमों से कह दो की रुकना है मना
जीने की चाहत अभी बाकी है दिल मे..
मायूसी से कह दो की छाना है मना
उम्मीद की शौहरत अभी बाकी है दिल मे..
अगर खफा है तक़दीर तो रहने दो खफा,
खुद लड़ने की हिम्मत अभी बाकी है दिल मे..
ग़लतफहमी है ज़माने को, की हार गये हम,
जीत से मोहब्बत अभी बाकी है दिल मे..!!!
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