एक उसूल पे चलती है जिंदगी अपनी
जिसको गरीब नवाज़ से प्यार नही
वो अपना यार नही
है ये फरमाने इलाही मेरा फ़रमान नही
जो मोहम्मद को न माने वो मुसलमान नही
सुनाने अपनी बरबादी के अफसाने कहा जाते
तेरा दर छोड़कर ख्वाजा ये दिवाने कहा जाते
हमेशा भीख हमने तो इसी चौखट से पाई है
हम अपना दामन उम्मीद फैलाने कहाँ जाते
हक मोईन या मोईन
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कोई बशर *हसीनाओ*की सूरत मे कैद है..!!
तो कोई अपने नाम की *शोहरत* मे कैद है..!!
कोई जनाब *नफ़्स* की दौलत मे कैद है..!!
या *गरीब नवाज* दिल मेरा फक़त तेरी मोहब्बत मे कैद है.
लिख लिख के मैं तेरे नाम को चूम रहा हूँ
और नाते नबी सुनके मैं झूम रहा हूँ
जगाये ना अब मुझको नींद से कोई
मैं ख़्वाब में नालैन ए नबी चूम रहा हूँ
बीमारे मोहब्बत हु... दवा मांग रहा हु ...
सरकार के दामन की हवा मांग रहा हु...
ज़ंज़ीर बांध क़र मुजे ले चलिए मदीना
मुजरिम हु मदीने की सज़ा मांग रहा हु....
_*SALLALLAHO ALAIHI WASSALLM*_
- खुशबु आ रही है
कहीँ से ताज़ा गुलाब
की...
शायद खिड़की खुली
रह गयी है
दरबार ऐ “खवाजा गरीब नवाज़"
की ।
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