इश्क़ है या कोई उसका
कभी कभी याद करती हैं,
जैसे खलने का हो मन उसका....
_________________________________________
✍✍ तुम आओगी तो "फूलों" की "बरसात" करूँगा...!!
✍✍ "मौसम" के "फरिश्तों" से मेरी बात हो चुकी है...!!
_________________________________________
✍✍दिल भी एक जिद पे अड़ा है किसी बच्चे कि तरह...
✍✍या तो सब कुछ ही उसे चाहिए या कुछ भी नही...
_________________________________________
✍✍ नज़र से "नज़र" मिलाकर तुम "नज़र" लगा गए...!!
✍✍ ये कैसी लगी "नज़र" की हम हर "नज़र" में आ गए...!!
_________________________________________
✍✍ हलकी हलकी "बेवजह" सी "मुस्कुराहटें" और तेरा ज़िक्र...!!
✍✍ देखो ना ये कही "मोहब्बत" की "आहट" तो नहीं...!!
_________________________________________
: ✍✍ अदाएँ सीख ली तुमने "नज़र" से "क़त्ल" करने की...!!
✍✍ मगर "तालीम" ना सीखी किसी से "इश्क़" करने की...!!
_________________________________________
✍✍✍भूल जाना उसे मुश्किल तो नहीं है लेकिन;
✍✍काम आसान भी हमसे कहाँ होते हैं!
_________________________________________
✍✍हौसले फिर बढ़ गये, टूटा हुआ दिल जुड़ गया,
✍✍उफ! यह जालिम मुस्कुरा देना, खफा होने के बाद..
_________________________________________
✍✍मेरी किस्मत में तो सिर्फ़ तुम्हारी यादें है..
✍✍जिसके मुक़द्दर में तुम हो उसकी तकदीर को सलाम..
_________________________________________
✍✍हुस्न से वह बेखबर था, मैं अपने इश्क से..
✍✍अब कहाँ से लाऊँ वह नावाकाफियत के मजे..
_________________________________________
✍✍नकाब कहती है मैं पर्दा-ए-कयामत हूँ,
✍✍अगर यकीं न हो तो देख लो उठा के मुझे..
_________________________________________
✍✍ तुझे भूलने की कोशिश की मगर "कामयाब" ना हो सके...!!
✍✍ तेरी याद "शाख़-ऐ-गुलाब" है जो हवा चली तो "महक" गई...!!
_________________________________________
✍✍ कहाँ मुमकिन था मैं दिल से तेरी "याद" को मिटा देती...!!
✍✍ भला कैसे मैं "जीती" फिर अगर तुझको मैं "भुला" देती...!!
_________________________________________
✍✍तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;
✍✍एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे!
_________________________________________
✍✍ किसी ने कहा आपकी आँखे बड़ी खूबसूरत है,
✍✍मैने कह दिया कि, बारिश के बाद अक्सर मौसम सुहाना हो जाता है
No comments:
Post a Comment