*अनमोल मोती पोस्ट नं 1⃣2⃣3⃣*
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*गुस्ताख-ए-रसूल को हर सय पहचानती है और नफरत करती है*
❤हजरत अनस (रजी अल्लाहु अन्हु फरमाते है की, एक ईसाइ मुस्लमान हुआ उसने सुरह बक्र और सुरह आले ईमरान पढ़ी फिर ओ नबी-ए-करिम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की बारगाह मे "वही" की किताबात करने लगा, इसके बाद ओ ईसाइ हो गया और कहता था की मुहम्मद! वही
जानते है जो मैनें लिख दिया है!, फिर अल्लाह तआला ने इसको मौत दे दी, और लोगो ने इसे दफन कर दिया, अगले दिन उसकी लाश जमीन पर पड़ी मिली, कहने लगे ये मुहम्मद! और उसके साथीयों
ने किया होगा क्योंकी यह उनके पास से भागकर आया था, इसलिए इन लोगो ने हमारे आदमी की कब्र खोद डाली!!दुसरे दिन इन लोगो ने इसके लिए और गहरी कब्र खोदी लेकीन ओ अगले दिन जमीन पर पड़ा मिला, कहने लगे यह मुहम्मद! और उनके साथीयो का काम है क्योंकी यह इनके पास से भाग आया था!, तिसरे दिन इन लोगो ने इसके लिए जितनी उनकी बस की बात थी उतनी गहरी कब्र खोदी, सुबह हुई तो फिर देखा की लाश बाहर पड़ी हुई
है।, अब ओ लोग समझे की यह इंसानो का काम नही है (यानी यह सब कुछ गैब से हो रहा है) तो उसे वही पड़े रहने दिया *(बुखारी, जिल्द-1, बाब-अलमतीन नुबुवत,पेज-511)*
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*✿तसरीह : इस हदीस का खुलासा यह है की गुस्ताख-ए-रसूल को हर सय पहचानती औरइससे नफरत करती है।, जमीन ने भी ईस बे-अदब को कबुल न किया और बार बार दफनाने के बा-वजुद ओइसे बाहर निकालकर फेक देती थी,*
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