*नमाज की शान*
.
.
जब बंदा नमाज के लिए खड़ा होता है
.
''तो सर से आसमान तक रहमते इलाही-घटा बन के छा जाती है''
फरिश्ते उसके चेहरे की तरफ जमा हो जाते हैं,
.
एक फरिश्ता पुकारता है
.
*ऐ नमाजी अगर तू देख ले कि तेरे सामने कौन है और तू किससे बात कर रहा है*
तो कसम उस पाक जात की
.
.
जिसने तुझे पैदा किया तो
.
.
*तु कयामत तक सलाम ना पढे*
No comments:
Post a Comment