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*आला हजरत पर सलाम पढना कैसा है ?*
*कुरआन शरीफ़ में है कि अगर तुमको कोई सलाम करे तो तुम उसका जवाब उससे बेहतर अंदाज से दो !*
आला हज़रत ने हमें सलाम करा है, तो हमारा फर्ज़ है कि उसका जवाब हम अच्छे अंदाज से दे ! आप कहेंगे कि आला हज़रत ने हमे कब सलाम कहा है, हम तो उनके वक़्त में नहीं थे ! तो मैं उन लोगो से मे कहना चाहूंगा की आला हज़रत ने हमे नही बल्कि नबी सलल्लाहु अलैहि वसल्लम की सारी उम्मत को सलाम कहा !
आला हज़रत ने कहा-:
*एक मेरा ही रहमत पे दावा नही,*
*शाह की सारी उम्मत पे लाखों सलाम !!*
☪जब ईमान वालों ने सुना की आला हज़रत ने हमे सलाम कहा है, तो हमेें कुरआन शरीफ याद आया कि खुदा ने कहा-: जब कोई तुम्हे कोई सलाम कहे तुम उसका जवाब अच्छे अंदाज मे दो !
तभी ईमान वालों ने कहा-:
*डाल दी क़ल्ब में अज़मते मुस्तफ़ा,*
*सैय्यदी आला हज़रत पे लाखों सलाम !!*
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