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अपनी तन्हाई की फिक्र करूँ या तेरी उदासी की
मेरे बिना तेरा भी तो दिल नहीं लग रहा होगा...!!
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अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता!
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता!
यह तो करिश्मा है मोहब्बत का!
वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता!
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❤नफरत को हम प्यार देते है .....
प्यार पे खुशियाँ वार देते है ...
बहुत सोच समझकर हमसे कोई वादा करना..
" ऐ दोस्त " हम वादे पर जिदंगी गुजार देते है❤***
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बहाने कयूँ ढूढंते हो मुझ से दूर जाने के, साफ-साफ कह दो की अब मन नहीं करता मुझसे बात करने का
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नज़र को नज़र की खबर ना लगे कोई अच्छा भी इस कदर ना लगे आपको देखा है बस उस नज़र से जिस नज़र से आपको नज़र ना लगे.
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खोकर पाने का मज़ा ही कुछ ओर है रोकर मुस्कुराने का मज़ा ही कुछ ओर है हार तो ज़िंदगी का हिस्सा है मेरे दोस्त हारने के बाद जीतने का मज़ा ही कुछ ओर है…
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वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी… मिलेगी नज़रो से नज़रे तो अपनी नज़रे ज़ुका लेगी… उसे मेरी कबर पर दीया मत जलाने देना… वो नादान है यारो… अपना हाथ जला लेगी.
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फूल सबनम में डूब जाते है झख्म मरहम में डूब जाते है | जब आते है खत तेरे| हम तेरे गम में डूब जाते है.|
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तेरे गम को अपनी रूह में उतार लूँ..जिन्दगी तेरी चाहत में सवार लूँ..मुलाकात हो तुझ से कुछ इस तरह..तमाम उमर बस इक मुलाकात में गुजार लूँ....!! ...
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जब से देखा है तेरी आँखों मे झाक कर कोई भी आईना अच्छा नहीं लगता तेरी मोहब्बत मे ऐसे हुए हैं दीवानें तुम्हें कोई और देखें अच्छा नहीं लगता...!! ...
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बनाने वाले ने दिल काँच का बनाया होता . तोड़ने वाले के हाथ मे जखम तो आया होता . जब बी देखता वो अपने हाथों को उसे हमारा ख़याल तो आया होता
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Alvida kehkar jab wo chal diye,
Ankhon ne sare haseen khwab kho diye,
Gum ye nhi k wo mujhe chod gye,
Dard to tab hua jab Alvida kehkar wo khud ro diye…
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Ankhe ro padhi unka na paigam aaya,
Chale gaye humein akela chhod ke ye kesa mukam aaya,
Meri tanhai Hansi mujhpe
Aur boli Bata
Aakhir mere siva tere kon kaam aaya…
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Apni bebasi par aaj rona sa aaya
Doosron ko nahi maine apno ko azmaaya
Har dost ki tanhaayi door ki
Lekin khud ko har morh par tanha hi paya..!
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Bhahut roya tha jab mera janam hua tha,
Aur Hans rahi thi ye Duniya,
magar Doston Ek Din Badala lunga,
Hansta hua jaunga aur Royegi ye Duniya…
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किसी की मजबूरी का मजाक ना बनाओ यारों...
ज़िन्दगी कभी मौका देती है तो कभी धोखा भी देती है...
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ख़ुशी देने वाले अपने तो होते ही है...
पर गम देने वाले भी अजनबी नहीं होते...
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अजब दस्तुर है इस जमाने का यारों...
लोग यहाँ पुरी ईमानदारी से अपना ईमान बेचते है...
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नसीब से ज्यादा भरोसा "पगली"तुम पर किया,फिर भी.......!
नसीब इतना नही बदला जितना तुम बदल गयी.......!!
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शाम होते ही चिरागों को बुझा देता हूँ मैं...
ये दिल ही काफ़ी है तेरी याद में जल जाने के लिए...
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