अब तो तन्हाई में रहने का आदि हो चूका है दिल,
बदल गए है वो लोग जो सुबह शाम हाल पूछा करते थे !!
एक ही समानता है…
पतंग औऱ जिन्दगी में..
ऊँचाई में हो तब तक ही,
‘वाह – वाह’ होती है....!!!
प्यार की नन्ही सी परिभाषा.......
तुम हो तो बसंत....तुम नहीं तो बस-अंत.......
शम्मे न जला तू अभी,
रहने दे अंधेरे को..
तू रात के पहलू में
एक चांद सी लगती है.... ✍
सर्द रातों की तन्हाई में,
दिल अपना कुछ यूँ बहलातें हैं...
कुछ उनका लिखा दोहरातें हैं,
कुछ अपना लिखा मिटाते हैं...
बंदिशों में हीं पाकीज़ा हुआ करती हैं मासूम मुहब्बतें,
आज़ाद ख्याल इश्क़, तो महज़ आवारगी हुआ करता है !!
कभी चोट खाई, कभी दिल सम्भाला,
मोहब्बत भी एक खेल था, खेल डाला........✍
Mere lafzon ki pehchan agar kar laita wo saqib
Usy mujse nahi khud say muhabbat ho jati..!
Mre Chehre Or Baaton Se Dard Nai Pahchaan Paoge..
Mri to Aadat Hai Har Baat Pe Muskura Dena
Mri Hr Nzar Me Basa He Tu,
Mre Har Qalam Pe Likha He Tu..
Tujhe Soch Loon To Ghazal Meri,
Na Likh Sakoon To Khayal Hai....
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