okat ki mat Pucho bahut jydaa hoti hai uski,
wo Chod de tum uff naa karoge ......
_______________________________________
मौसम जो ये थोड़ा खुश्क हो जायेगा,
न उलझिए हमसे जनाब , इश्क़ हो जायेगा..
_______________________________________
बनि है यह महफ़िल कॉपी past के लिये
आटा है यहां हर कोई हाल ए दिल कहने....
_______________________________________
maaaf krna dosti muze shyari likhna na ata..
betha apke sath sikhne ke liye
_______________________________________
Nhi aati yha shayri kisi ko,
bas kuch bhi likh dete hai uska naam lakr
_______________________________________
बहुत सताती हो तुम यो जवाब ना दे कर...
एक दिन मै भी रुलाओंग तुम्हे तनहा छोड़कर....
_______________________________________
चलता आ रहा था सिलसिला प्यार में बर्बाद होने का,
भीड़ देखकर हम भी शामिल हो गए साहब !
_______________________________________
हम तो पता भी नही था कैसे उसके दीवाने हो गये,
वो थोड़ा ज्यादा बोलती थी फिर भी उसी के दीवाने हो गये
_______________________________________
दबी हुई थी जो बातें दिल में वो बाहर आ रही है...
मेरी मासूम सी मोहब्बत शायरी में मुस्कुरा रही है...!!
_______________________________________
*खुलासा तो कर दूँ , दिल की दौलत का मगर,*
*मेरी ये संपत्ति, मेरी आय से अधिक है !
_______________________________________
ऐसा तो नहीं, उन्हें मेरा खयाल आया न होगा*
*ये बात दूसरी है , उन्होंने ये राज बताया ना होगा*
_______________________________________
क्या हुनर है तुझमे पगली....हमारे बेग से
कोई
पेन्सिल ना चुरा पाया और तूने सीने से
दिल चुरा लिया...
_______________________________________
कहने को तो कई बाते है इस दिल में
मुख़्तसर लफ्जो में आखिरी ख्वाहिश सिर्फ तुम हो
_______________________________________
"आशियाने बनाए भी तो कहाँ बनाए जनाब....
ज़मीने महँगी होती जा रही है और दिल में जगह लोग देते नहीं है...."
_______________________________________
अजीब हैं इस दुनिया का दस्तूर... लोग इतनी जल्दी बात नहीं मानते, जितनी जल्दी बुरा मान जाते हैं ।
_______________________________________
कागज़ पर मेरा बिकता रहा
मैं बैचैन था रातभर लिखता रहा !!
छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान की
मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता रहा !!
दरख़्त होता तो, कब का टूट गया होता
मैं था नाज़ुक डाली, जो सबके आगे झुकता रहा !!
बदले यहाँ लोगों ने, रंग अपने-अपने ढंग से
रंग मेरा भी निखरा पर, मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा !!
जिनको जल्दी थी, वो बढ़ चले मंज़िल की ओर
मैं समन्दर से राज गहराई के सीखता रहा !!
_______________________________________
तरसते थे जो मिलने को हमसे कभी!
आज वो क्यों मेरे साए से कतराते हैं!
हम भी वही हैं दिल भी वही है!
न जाने क्यों लोग बदल जाते हैं
_______________________________________
;ना चाहते हुए भी, तेरे बारे में, बात हो गई ...
कल आईने में, तेरे आशिक़ से, मुलाक़ात हो गई..
_______________________________________
में मर जाऊ और
मिले मेरा हमदम तो उस से कह देना.....!!
बिना तेरी मुहब्बत के वो पागल जी नही पाया.....!
No comments:
Post a Comment