ऐ सुनो...
सज संवर के तैयार रहना तुम,
ईद पर चांद का क्या भरोसा निकले ना निकले...
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मेरा वक़्त बोला मेरी हालत
को देख कर...
मैं तो गुजर रहा हूँ तू भी गुजर
क्यों नहीं जाता...
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अपनी खुशियां भूल जा औरों के दर्द ख़रीद...
तब जा के कहीं पूरी होगी तेरी ईद....
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दोस्ती नज़रों से हो तो उससे कुद्रत
कहते है, सितारों से हो तो जन्नत
कहते है, आँखों से हो तो मोहब्बत
कहते है, और दोस्ती आप से हो
तो किस्मत कहते है
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मुकद्दर की लिखावट का इक ऐसा
भी कायदा हो,
देर से क़िस्मत खुलने वालों का
दुगुना फ़ायदा हो।
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मुसीबतों से निखरती है शख्सियत
यारों.........,
जो चट्टानों से न उलझे..
वो झरना किस काम का.......
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*मैंने बस एक गाल चूमा था...*
*दूसरा ख़ुद बढ़ा दिया उस पगले ने...*❤
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होंठ लगे जब काँपने, करने में इज़हार..
तब नैनों ने ये कहा, है मुझको तुमसे प्यार...
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: यूं जुल्फों के साये में हमें सुलाया ना कर
इश्क के साये में हम खुद को भुला देते हैं।।।।
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नज़रें उठा के हमने उन्हें देख क्या लिया !
करके नक़ाब ईद का वो चाँद हो गए !! -
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: ना हाथ दिया, न गले मिले, न मयस्सर
तुम्हारी दीद हुई
अब तुम ही बताओ ऐ " दिलबर "
ये कयामत हुई कि ईद हुई...
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