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एक बार एक शिकारी
जंगल से एक तीतर
पकड़ कर लाता है।
उसे अपने घर पर
अलग पिंजड़े में
रखता है और खूब
काजू किशमिश
बादाम खिलाता है।
जब तीतर बड़ा हो
जाता है तो उसे पिंजड़े
के साथ ही लेकर जंगल
जाता है वहाँ जाल
बिछाता है और तीतर
को वहीं पिंजड़े में
रखकर खुद झाडी
के पीछे छिप जाता है।
और तीतर से बोलता है : "बोल बेटा!"*
*तीतर अपने मालिक की
आवाज़ सुनकर जो
जोर से चिल्लाता है,
उसकी आवाज़ को
सुनकर जंगल के
सारे तीतर ये
सोचकर की ये
अपनी कौम का है,
जरूर किसी परेशानी में है।
मदद करने के लिए
खिंचे चले आते हैं
और शिकारी के
बिछाये हुए जाल
में फंस जाते हैं।
फिर शिकारी मुस्कुराते
हुए आता है,
पालतू तीतर को अलg
कर वो सारे तीतरों को
दूसरे झोले में रखकर घर
लाता है।
इसके बाद
अपने पालतू तीतर के
सामने ही पकडे गए सारे
तीतरों को एक- एक कर
काटता है, मगर पालतू
तीतर उफ़ तक नही करता।
कैसे करता उसे अपने
हिस्से का खुराक काजू
किशमिश बादाम जो मिल रहा था!*
कमोबेश यही हालात
आज के मुसलमानों की
भी हो गया है।
शिकारी ( राजनितिक दलों ने...)
ने ऐसे ना जाने कितने तीतर
पाल रखें हैं, जो अपनी
कौम को कटता तो देखतें हैं
मगर उफ़ तक नहीं करते!
_मुसलमानों सावधान हो जाओ !
_ऐसे तीतरों को पाहचनो
और कौम को आगह करो।
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